Description
कहानी का उद्देश्य
इस कहानी का उद्देश्य यही है कि किसी को बेवजह परेशान या अत्याचार नहीं करना चाहिए। मानवता को समझते हुए, मिल-जुलकर और प्रेमभाव से जीवन जीना चाहिए।
मिल-जुलकर और प्रेमभाव से रहने से ही मनुष्य आगे बढ़ता है और एक-दूसरे के लिए सहारा बनता है। किसी को जबरदस्ती हैरान या परेशान करने से अंततः हमारा ही घर और जीवन बर्बाद होता है।
यदि हमारे भीतर आत्मविश्वास और काबिलियत है, तो हमें उसी के बलबूते पर आगे बढ़ना चाहिए। मेहनत और ईश्वर पर विश्वास रखकर यह सोच विकसित करनी चाहिए कि एक न एक दिन हमारी मेहनत का फल अवश्य मिलेगा।
क्योंकि यही इस संसार का नियम और ऊपरवाले का न्याय है। जिसने जितना बुरा चाहा है, उसे उतना ही कठोर परिणाम मिला है। ऊपरवाले का न्याय अहंकार को तोड़ देता है, क्योंकि वह बदला नहीं बल्कि इंसाफ होता है।
मानव का बदला भावनाओं से जुड़ा होता है, लेकिन ऊपरवाले का न्याय सत्य और धर्म से जुड़ा होता है। हम भले ही सब न देख पाएं, पर ऊपरवाला टूटे हुए दिलों, बहते हुए आँसुओं, मौन पीड़ा और अनकहे अत्याचारों को भी देखता और समझता है।
इसलिए, जब कोई आपको दुख दे, परेशान करे या आपका उपहास उड़ाए, तो तुरंत बदला लेने की बजाय उसे ऊपरवाले पर छोड़ देना ही बेहतर है। प्रतिशोध की राह पर चलना समाधान नहीं है।
चेतावनी
इस कहानी में बदला लेने के लिए जो विचार प्रस्तुत किए गए हैं, वे केवल कथानक का हिस्सा हैं। कृपया इन्हें अपने जीवन में लागू न करें। किसी को भी इस प्रकार नुकसान पहुँचाना उचित नहीं है।



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