Description
ॐ श्री गुरुभ्यो नमः यह पावन कृति “गृहस्थ बाल ब्रह्मचारी” परम पूज्य, करुणामूर्ति, जन-जन के पथप्रदर्शक एवं लोककल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले पूज्य महाराज जी के श्रीचरणों में सादर समर्पित है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तप, सेवा, भक्ति और मानवता का जीवंत उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने सरल व्यवहार, मधुर वचनों और दिव्य उपदेशों के माध्यम से असंख्य लोगों के जीवन में आशा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का दीप प्रज्वलित किया। उनके सान्निध्य में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को ईश्वर की कृपा के अधिक निकट अनुभव करता था। यह पुस्तक केवल उनके जीवन का वर्णन नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रदत्त उन अमूल्य शिक्षाओं का विनम्र संकलन है, जो आज भी साधकों और गृहस्थों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश-स्तंभ के समान हैं। इस ग्रंथ में संकलित प्रत्येक शब्द उनकी कृपा, प्रेरणा और आशीर्वाद का ही प्रसाद है। परमात्मा से प्रार्थना है कि पूज्य गुरुदेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे तथा उनके आदर्श, उपदेश और जीवन-दर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरणा प्रदान करते रहें। शत-शत नमन। जय सियाराम। जय गुरुदेव।







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